गेटवे ऑफ़ इंडिया : इतिहास एवं रोचक तथ्य

Gateway of India

वैसे तो भारत में कई पर्यटन स्थल हैं लेकिन अगर हम मुंबई की बात करें तो हमारे मन में सबसे पहले गेटवे ऑफ इंडिया (Gateway Of India) का नाम आता है। क्या आप जानते हैं की गेटवे ऑफ इंडिया का इतिहास क्या है और इसे किस कारण से बनाया गया था और किसने बनाया था? तो चलिए दोस्तों आज हम आपको अपने इस लेख की मदद से गेटवे ऑफ इंडिया के बारे में पूरे विस्तार से बताएंगे कि इसे किसने कब और क्यों बनवाया था और साथ-साथ हम आपको इसके कुछ रोचक तथ्यों के बारे में भी बताएंगे और अगर आपके मन में यह भी संदेह है की आखिर गेटवे ऑफ इंडिया और इंडिया गेट में क्या अंतर है तो हमारे इस लेख को ध्यान से पढ़ें।

गेटवे ऑफ इंडिया भारत की सबसे लोकप्रिय धरोहरों में से एक माना जाता है। यह भारत का एक बहुत ही बड़ा ऐतिहासिक स्मारक है जो कि मुंबई के होटल ताज महल के ठीक सामने स्थित है। अगर इसकी ऊंचाई की बात करें तो यह 26 मीटर यानी कि 85 फीट ऊंचा है और इसकी गुंबद  का व्यास 15 मीटर है। यह स्मारक साउथ मुंबई के अपोलो बंदर क्षेत्र में अरब सागर के बंदरगाह पर स्थित है। गेटवे ऑफ इंडिया अरब सागर के समुद्री मार्ग से आने वाले जहाजों के लिए भारत का द्वार भी कहा जाता है। इसे अरब सागर की ओर बनाया गया है जो मुंबई शहर के एक अन्य आकर्षण मरीन ड्राइव से जुड़ा है, यह एक सड़क है जो समुंद्र के साथ साथ चलती है। इसे देखने के लिए प्रतिवर्ष लाखों लोग आते हैं और यह मुंबई के लोगों की जिंदगी का एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि यह शहर की संस्कृति को दर्शाता है जोकि ऐतिहासिक और आधुनिक संस्कृति को जोड़ता है।

गेटवे ऑफ इंडिया का इतिहास (Gateway of India History in Hindi):-

अगर गेटवे ऑफ इंडिया की इतिहास के बात करें तो इसका निर्माण सन 1924 में हुआ था। जिसकी संरचना के निर्माण में भारत सरकार का लगभग 21 लाख रुपए खर्च हुआ था। गेटवे ऑफ इंडिया की संरचना के निर्माण के पीछे मुख्य उद्देश्य किंग जॉर्ज और क्वीन मैरी कि मुंबई यात्रा था, जो कि उनकी यात्रा को याद करने के उपलक्ष्य ने बनाया गया था। गेटवे ऑफ इंडिया का निर्माण दिल्ली दरबार से भी पहले हुआ था। वैसे तो गेटवे ऑफ इंडिया का निर्माण किंग जॉर्ज और रानी मैरी के लिए किया गया था परंतु वह इसकी संरचना का एक ही मॉडल देख पाए थे क्योंकि उस समय इसका निर्माण  शुरू नहीं किया गया था। गेटवे ऑफ इंडिया के निर्माण का नीव 31 मार्च 1911 को मुंबई के राज्यपाल चार्ज सिडेनहैम क्लार्क ने रखी थी, जिसके बाद जॉर्ज वीटेट ने 31 मार्च 1914 को इस के अंतिम डिजाइन को मंजूरी दी थी, जिसके बाद गेटवे ऑफ इंडिया का निर्माण सन 1915 में शुरू हुआ। गेटवे ऑफ इंडिया को पीले बेसाल्ट चट्टानों से बनाया गया था। 1915 और 1919 के बीच में अपोलो बंदरगाह पर इसका काम शुरू हुआ जहां पर गेटवे ऑफ इंडिया और नए समुद्री दीवार का निर्माण किया गया। गेटवे ऑफ इंडिया नीव का काम 1920 में पूरा किया गया था जिसके बाद करीब एक दशक तकिया इमारत बनती रही और 1924 में यह पूरी तरह बनकर तैयार हुई। 4 दिसंबर 1924 को वायसराय अर्ल ऑफ रीडिंग ने उद्घाटन किया था। इंडो सरासेनिक डिजाइनर तरीके से बनी इस इमारत पर मुस्लिम स्थापत्य और गुजरात के स्थापत्य के स्टाइल का महत्व माना जाता रहा है। कुछ वक्त बाद स्वामी विवेकानंद और छत्रपति शिवाजी की भी मूर्तियां गेटवे पर स्थापित की गई थी। आज यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण स्मारकों में से एक के रूप में बना हुआ है। यह ताकत, शक्ति और शांति का प्रतीक है।

गेटवे ऑफ इंडिया से जुड़े कुछ रोचक तथ्य (Facts about Gateway of India):-

  • अगर गेटवे ऑफ इंडिया से जुड़े एक रोचक तथ्य के बाद करें तो जब आजादी के बाद 1947 में अंग्रेज भारत छोड़कर जा रहे थे तो उनका आखिरी जहाज भी यहीं से रवाना हुआ था।
  •  गेटवे ऑफ इंडिया को मुंबई के ताज महल के रूप में भी जाना जाता है।
  •  गेटवे ऑफ इंडिया देश में तीन प्रमुख आतंकवादी हमलों का स्थान रहा जो 2003 और 2008 में मुंबई ताज होटल और अन्य प्रमुख स्थानों पर हुए थे।
  •  गेटवे ऑफ इंडिया के समीप ही पर्यटक को के समुंद्र भ्रमण हेतु नाव की सेवा भी उपलब्ध है जो इसकी सुंदरता को और भी दर्शाती है।
  • गेटवे ऑफ इंडिया के गुंबद के निर्माण में 21 लाख रुपए का खर्च आया था और पूरे गेटवे ऑफ इंडिया का निर्माण में 2.1 मिलियन की लागत आई थी।

गेटवे ऑफ इंडिया और इंडिया गेट में अंतर (Difference between India Gate & Gateway of India in Hindi)

गेटवे ऑफ इंडिया और इंडिया गेट में अंतर
गेटवे ऑफ इंडिया और इंडिया गेट में अंतर
  • गेटवे ऑफ इंडिया और इंडिया गेट मे पहले अंतर की बात करें तो इंडिया गेट दिल्ली के राजपथ पर स्थित है और वहीं दूसरी तरफ गेट ऑफ इंडिया की बात करें तो वह दक्षिण मुंबई में समुंदर तट के पास स्थित है।
  • अगर इन दोनों की ऊंचाई की बात करें तो गेटवे ऑफ इंडिया की ऊंचाई महज सिर्फ 26 मीटर है और वही बल्कि इंडिया गेट की ऊंचाई 42 मीटर है जो कि गेटवे ऑफ इंडिया से 16 मीटर ज्यादा ऊंची है।
  • दोनों के बनने के बिल्कुल ही अलग कारण है, गेटवे ऑफ इंडिया ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम और रानी मैरी की भारत यात्रा को याद रखने के उपलक्ष में बनवाया गया था और वहीं दूसरी तरफ इंडिया गेट का निर्माण प्रथम विश्व युद्ध और अफगान युद्ध मैं मारे गए भारतीय जवानों की याद रखने के उपलक्ष में बनवाया गया था जिस पर उनके नाम भी उतरे हुए हैं।
  • इन दोनों के वास्तुशिल्पी की बात करें तो इंडिया गेट के वास्तुशिल्पी थे एडविन ल्युट्यैन्स और वहीं दूसरी तरफ गेटवे ऑफ इंडिया के वास्तुशिल्पी थे जॉर्ज वीटेट।
  • गेटवे ऑफ इंडिया तो 1924 में ही बनकर तैयार हो गया था और वहीं दूसरी तरफ  इंडिया गेट 1931 में बनकर तैयार हुआ था।
  • इंडिया गेट का निर्माण करने में मुख्य रूप से लाल और पीले पत्थरों का उपयोग किया गया था जीन्हे खासतौर पर भरतपुर से लाया गया था और वहीं दूसरी तरफ गेटवे ऑफ़ इंडिया के निर्माण में मुख्य रूप से पीले बेसाल्ट चट्टानों का इस्तेमाल किया गया था।
  • इंडिया गेट को मूल रूप से अखिल भारतीय युद्ध स्मारक भी कहा जाता है और वहीं दूसरी तरफ गेटवे ऑफ इंडिया को समुद्र के रास्ते भारत आने वालों के लिए भारत का मुख्य द्वार कहा जाता है और साथ साथ इसे कुछ लोग मुंबई का ताज महल कहते हैं।

तो दोस्तो हम उम्मीद करते हैं कि अगर आप गेटवे ऑफ इंडिया और इससे जुड़े इसके रोचक तथ्यों तथा इतिहास के बारे में जानना चाहते होंगे तो हमारा यह लेख आपके लिए मददगार साबित होगा। अगर फिर भी आपके मन में गेटवे ऑफ इंडिया से लेकर और कोई प्रश्न या सवाल है तो आप हमारे द्वारा नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स (Comment Box) में पूछ सकते हैं। हम आपको पूरी जानकारी देंगे।

धन्यवाद!

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