अपने नाम की Ringtone बनाने के लिए फॉलो करें ये टिप्स

Apne Naam ki RingTone Kaise Banaye?

आज के टेक्निकल युग में हर व्यक्ति एडवांस हो रहा है। अपने आप को अधिक प्रभावी और सबसे अलग दिखाने की होड़ में और दौड़ में हर व्यक्ति आगे निकलना चाहता है। स्मार्ट बनने के इस युग में आज का व्यक्ति अपने हर समय के साथी Smart Phone को भला कैसे छोड़ सकता है। आज के मॉडर्न युग में हर किसी के पास स्मार्ट फोन देखने को मिल जायेगा। स्‍मार्ट फोन ने काफी हद तक व्यक्ति बँधा हुआ सा है। खासकर युवा  स्मार्ट फोन का उपयोग खूब कर रहे हैं। स्मार्ट फोन के फीचर्स ने हमारे जीवन को आसान बना दिया है। लेकिन स्मार्ट फोन का उपयोग भी स्मार्ट तरीके से होना चाहिए। अपने स्मार्ट फोन को हर व्यक्ति समय के साथ अप-टू-डेट रखना तथा और अधिक स्मार्ट बनाना ही चाहता है। यूँ तो स्मार्ट फोन से न जाने कितनी ही तकनीकें जुड़ी हुई हैं, लेकिन एक ऐसी तकनीक भी है जो आपके फोन के सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण फंक्शन से जुड़ी हुई है और वह है Incoming Call का संकेत देने वाली ध्वनि यानी Ringtone। 

हम अगर Ringtone की बात करें तो हर एक व्यक्ति स्वयं को सबसे जुड़ा रखने के लिए एक अलग ही प्रकार की Ringtone को सेट करना चाहता है। अब यदि इस रिंगटोन में अगर आपका अपना प्यारा और शुभ नाम भी जुड़ जाए तो फिर क्या कहने। आपका अपना फोन जब आपको आपका नाम लेकर बुलाएगा तो आपकी रिंगटोन को सुनने के मजे में चार चाँद लग जायेंगे और सब का ध्यान अचानक ही आपकी ओर खींचा हुआ चला जायेगा। अब आज के समय में भला ऐसा कौन होगा जो सबका ध्यान अपनी ओर नहीं खींचना चाहेगा। तो क्या अब आप भी चाहतें हैं कि जब आपका Smart Phone Ring करे तो आपके Phone की Ring tone में आपका नाम सुनाई दे,  आपका Smart Phone आपका नाम लेकर बोले कि हैलो आपका Phone Ring कर रहा है। तो फिर यह आर्टीकल आपके काम का है। इसमें हम आपको बताने जा वाले हैं कि कैसे आप अपने नाम की Ring Tone बना सकते हैं। तो आइए आज हम जानते हैं कि अपने नाम की Ring tone कैसे बनाई जाये और उसको अपने Smart Phone में किस तरह से Download किया जाये। 

अपने नाम की ऑनलाइन रिंगटोन बनाने के लिए कई वेबसाइट मौजूद हैं जिनमें prokeral.com, store.cdbaby.com, myandroidcity.comdownload.cnet.com, android.com, audiosparx.comऔर yournameringtone.com आदि प्रमुख हैं, इन वेबसाइट के अतिरिक्त अब अपने नाम की रिंगटोन बनाने के लिए प्ले स्टोर पर कुछ Apps भी उपलब्ध हैं, जिनमें My Name Ringtone Maker, My Name Ringtone Maker & Flash Alerts और Name Ringtone Maker के सहित करीब तीन दर्जन Applications मौजूद हैं।

आइये अब वेबसाइट के द्वारा अपने नाम की Ring Tone सेट करने के तरीके जानते हैं। Websites के ज़रिए नाम की रिंगटोन डाउनलोड करने का सबसे अच्छा तरीका तो यह है कि आप सबसे पहले गूगल पर सर्च करें Set My Name Ringtone, अब आपकी स्क्रीन पर आपको कुछ साइट दिखेंगी, जिनके अंदर जाकर आप इंस्ट्रक्शन्स फॉलो करते हुए बड़ी ही आसानी से अपने फोन में अपने नाम की Ringtone की audio file डाउनलोड कर सकते हैं।

Ringtone बनाने का एक अन्य तरीका यह है कि हम Apps के द्वारा Ringtone बनाएँ। यह तरीका Websites की तुलना में ज़्यादा सहूलियत भरा है, क्योंकि App को हम प्ले स्टोर पर जाकर सीधे डाउनलोड कर सकते हैं। आपको प्ले स्टोर पर जाकर सिर्फ सर्च करना है My Name Ringtone Maker और दर्जनों Apps आपके फोन की स्क्रीन पर आजायेंगे और फिर आप इनमें से किसी भी ऐप को डाउनलोड करके उस पर आप किसी के भी नाम की रिंगटोन कभी भी बना सकते हैं। Apps के माध्यम से नाम की रिंगटोन बनाने में एक खास बात यह भी है कि कई बार वेबसाइट पर कुछ नामों की रिंगटोन्स उपलब्ध नहीं होतीं हैं, किंतु एप्स में यह समस्या नहीं आती है|

यूँ तो प्ले स्टोर पर अनेक ऐप्स नाम की रिंगटोन बनाने के लिए उपलब्ध है लेकिन यहां पर हम नाम की रिंगटोन बनाने की प्रक्रिया को My Name Ringtone Maker & Flash Alerts एप के द्वारा समझते हैं। इस ऐप में जाकर आप को टेक्स्ट बॉक्स में अपना नाम एंटर करना है और इसे प्ले करके सेव कर देना है। इस एप में आपको MP3 कटर का फीचर भी मिलता है। अन्य एप्स में भी आप इसी तरह इंस्ट्रक्शंस फॉलो करके अपने नाम की रिंगटोन बना सकते हैं।


Passport क्या है? नया पासपोर्ट कैसे बनाये?

पासपोर्ट क्या है?

पासपोर्ट एक डॉक्यूमेन्ट है जिसको किसी भी देश के शासन द्वारा जारी किया जाता है। जैसे भारतीय नागरिकता रखने वाले व्यक्ति के लिए भारतीय सरकार (Indian Government) द्वारा भारतीय पासपोर्ट जारी किया जायेगा। पासपोर्ट किसी भी देश के नागरिक को यह स्वीकृति देता है कि वे किसी अन्य देश में जा सकें, वहाँ रह सकें, भ्रमण कर सकें अथवा जो विद्यार्थी हैं वे किसी अन्य देश में जाकर रहते हुए अध्ययन आदि कार्य कर सकें। पासपोर्ट कानून द्वारा वैध एक प्रामाणिक डॉक्यूमेन्ट है जो भारतीय नागरिकता (Indian Citizen) का प्रमाण है जो पासपोर्ट अधिनियम 1967 के अंतर्गत आता है। यह दस्तावेज हर विदेश यात्रा या दौरे पर जाने वाले व्यक्ति के लिए आवश्यक है क्योंकि पासपोर्ट ही कानूनी तौर पर यह प्रमाण देता है कि आप किस देश के निवासी नागरिक हैं।

पासपोर्ट कैसे बनवाएं ?

पासपोर्ट आम तौर पर तीन प्रकार के होते हैं

  • ऑर्डीनरी पासपोर्ट
    Ordinary Passport का रंग नीला होता है जो सामान्य नागरिक के लिये जारी किया जाता है, जो सामान्यतया विदेशी दौरे पर घूमने, रुकने, छुट्टी मनाने, अध्ययन करने अथवा व्यावसायिक कारणों से जाना चाहता है। इन Passports को जब जारी किया जाता है तो इनपर एक पी (P) शब्द अंकित रहता है। यह पी शब्द बताता है कि यह एक पर्सनल या ऑर्डीनरी पासपोर्ट है।

  • ऑफिशियल पासपोर्ट
    Official Passport का रंग सफेद होता है जो उनके लिए जारी किया जाता है जो कार्यालयीन आधार  (Official Base) पर भारतीय सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं। जैसे कि जो भारतीय शासन के कार्यकारी अधिकारी होते हैं जैसे आई. ए. एस. (I. A. S.) या आई. पी. एस. (I. P. S.) आदि जो निजी नहीं बल्कि भारतीय शासन के कार्य हेतु विदेश यात्रा पर जाते हैं। इस प्रकार के पासपोर्ट पर आपके परिचय के साथ एस (S) अक्षर अंकित होता है जिसका अर्थ होता है सर्विस (Service) यानी कि आप भारत सरकार की सेवा में हैं, और शासन आपको शक्ति प्रदान कर रहा है कि आप अन्य देश में जाकर शासन द्वारा दिये गये कार्य का संपादन करें ।

  • डिप्लोमैटिक पासपोर्ट
    Diplomatic Passport मेहरून रंग का होता है जो सरकार के मंत्रालय या संसद के विशिष्ट मंत्रियों जैसे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री, गृहमंत्री, राज्यमंत्री या सुरक्षा मंत्री आदि के लिए जारी किया जाता है जो यह प्रमाणित करता है कि आप भारतीय शासन या मंत्रीमण्डल में उच्च पद पर हैं । इस पासपोर्ट में डिटेल्स के साथ डी (D) अक्षर अंकित होता है

इनके अतिरिक्त भारत सरकार द्वारा दो अन्य पासपोर्ट भी जारी किये जाते हैं – Indo-Bangladesh Passport और Indo-Srilankan Passport । ये पासपोर्ट केवल बांग्लादेश और श्रीलंका देश में जाने हेतु जारी किये जाते हैं, ये विशेष तौर इन दोनों देशों के पड़ोसी भारतीय राज्यों के लिए जारी किये जाते हैं ।

शासन द्वारा अल्पशिक्षित या अशिक्षित और शिक्षित नागरिकों के भेद से ई. सी. आर. (E. C. R.)  और नॉन ई. सी. आर. (Non E. C. R.) ये दो प्रकार के पासपोर्ट जारी किये जाते हैं ।

सामान्य प्रश्न

Passport बनवाने का शुल्क कितना है?

Passport बनवाने के शुल्क में भी कई वर्गों या कारणों जैसे वयस्कता या अल्पवयस्कता आदि को लेकर भिन्नतायें हैं, पासपोर्ट खोने की स्थिति में इसको पुनः जारी करने की स्थिति में भी भिन्नतायें हैं।

पासपोर्ट बनवाने के लिए आवश्यक दस्तावेज क्या हैं?

रजिस्ट्रेशन के लिए आवश्यक दस्तावेजों में कक्षा 10 की अंकसूची, PAN card, Driving License या Birth Certificate (जन्मतिथि प्रमाण हेतु), Aadhar Card या Voter I. D.  (स्थायी पते के प्रमाण हेतु) और चार फोटोज़ ।

यदि आप सैलरीड या नौकरीपेशा हैं तो बैंक खाते की पासबुक भी पास रखें। आप यह सुनिश्चित अवश्य करें कि सभी आवश्यक दस्तावेज की जानकारियों में किसी भी प्रकार का अन्तर न हो क्योंकि पासपोर्ट प्राप्ति के लिये पूर्णतः प्रामाणिकता और पारदर्शिता आवश्यक है।

यदि आप वयस्क नहीं हैं अर्थात आपकी आयु 18 वर्ष के कम है तो आपके लिए औपचारिकताएं बढ़ जाती हैं जिनकी जानकारी आपको पासपोर्ट सेवा केन्द्र की Website से प्राप्त हो सकती है।

PassPort बनवाने में कितना समय लगता है?

पासपोर्ट बनवाने में आपको 25 दिन से लेकर 45 दिन तक का समय लग सकता है।

पासपोर्ट बनवाने के लिए अप्लाई कैसे करें?

Passport Time
Passport Time

Time needed: 45 days.

पासपोर्ट बनवा ने के लिए आपको सबसे पहले पासपोर्ट सेवा वेबसाइट पे जाके रजिस्टर करना पड़ेगा। पासपोर्ट सेवा पे रजिस्टर करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें!

  1. Passport Seva वेबसाइट पे रजिस्टर करें

    रजिस्ट्रेशन के लिए आपको सबसे पहले पासपोर्ट सेवा केन्द्र की Website पर जाना होगा, वहाँ सबसे पहले साइन अप पर जाकर Registration Form में सबसे पहले आप यह चुनेंगे कि आपको किस प्रकार का पासपोर्ट चाहिये, 36 पेज का सामान्य पासपोर्ट या 60 पेज का विशेष पासपोर्ट, इनके लिए आपकी योग्यताओं में भिन्नता है।वेबसाइट पे रजिस्टर करें

  2. अपनी जन्म तिथि एवं अन्य डिटेल्स डालें

    इसके बाद आपको वहाँ अपना नाम, जन्मतिथि, ईमेल आई. डी. और मोबाइल नम्बर डालना होगा। अपनी डिटेल्स डालें

  3. ईमेल वेरीफाई करें

    इसके बाद आपकी ईमेल आई. डी. पर एक Verification Link जायेगा, आप अपनी ईमेल आई. डी. पर जाकर उस Link पर क्लिक करें, जिसके बाद पासपोर्ट सेवा केन्द्र पर Verification का संदेश जायेगा । ईमेल वेरीफाई करें

  4. अपना पासवर्ड बनायें

    इसके बाद आप अपना लॉग इन आई. डी. Password  बनायें, जिसको आपको याद रखना है क्योंकि इतनी प्रक्रिया के बाद आपका पासपोर्ट सेवा केन्द्र का पेज बंद हो जाता है और आपको इसको पुनः ओपन करने के लिए लॉग इन आई. डी. Password डालना पड़ेगा, यदि आपको Password याद नहीं होगा तो आप यह पेज दोबारा नहीं खोल पायेंगे ।

  5. अपनी सामान्य जानकारी डालें

    इसके बाद आपको अपनी सामान्य जानकारी वहाँ भरनी होगी । अगर आप पहली बार Passport के लिये Apply कर रहे हैं, आप को Fresh Passport या Re-issue Passport में से अपने विकल्प को चुनना होगा।

    अपनी जानकारी को पूर्णतः जाँचते हुए आपको सेव करते हुए Next पर क्लिक करते जाना है। फिर आपको Submit Form करना है।
    Fresh Passport या Re-issue Passport

  6. पुनः Log in करें

    इसके बाद आपका पेज बन्द हो जायेगा और आपको पुनः Log in करना होगा । इसके बाद बायीं ओर आप View Submitted and Saved Passport पर क्लिक करें ।

  7. Payment करके फॉर्म जमा करें

    अपने नाम के ऑप्शन पर क्लिक करके पे एण्ड शेड्यूल ऑप्शन पर क्लिक करें, अपने शहर का चुनाव करें । फिर आपको वैरिफिकेशन के लिए एक तारीख (Date of Appointment) प्रदान की जायेगी, फिर नेट बैंकिंग खुलने पर पेमेन्ट करें, प्रिन्टेड पेज प्राप्त करें ।

  8. वेरिफिकेशन करवाएं

    दी गई तारीख को आप अपने सभी Original दस्तावेजों और चार फोटोज़ के साथ सम्पर्क करें । आपको लगभग 20 से 25 दिनों में आपको आपका पासपोर्ट प्राप्त हो जायेगा।

GPS क्या है? और कैसे काम करता है?

GPS का नाम तो आपने जरुर सुना होगा या अपने मोबाईल में भी ये अँप्शन आपने देखा होगा या फिर कोई जब लोकेशन की परमिशन माँगता हो तब GPS की आवश्यकता होती हैं। क्या आप जानते GPS क्या हैं ? इसका  इस्तेमाल कहा किया जाता है? ये सब हम इस पोस्ट में आपको बताने वाले हैं ।

GPS क्या है?

GPS क्या है? यह एक ऐसा सिस्टम हैं जो सभी मोबाइल फोन के अलावा वाहनों में भी उपयोग किया जाता हैं ।  GPS की फुलफाँर्म – Global Positioning System है । यह एक Global Navigation Satellite System है जो की किसी भी चीज की लोकेशन पता करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है । इस सिस्टीम  को सबसे पहले अमरिका में Defence Department ने 1978 में बताया था । उस समय ये सिस्टम सिर्फ US Army के इस्तेमाल के लिए बनाया गया था लेकिन बाद में 1980 ये सभी के लिए बनाया गया और आज हम ये हमारे मोबाइल में भी देखने को मिलता हैं और इस तकनिक का सबसे ज्यादा इस्तेमाल navigation  या रास्ता ढुँढने के लिए किया जाता हैं । अब ये Technology इतनी ज्यादा इस्तेमाल होती हैं की इसे आप  अपने मोबाइल में रेलवे में ,बस ,हवाई जहाज में  यहाँ तक की गाडियो में भी इसका इस्तेमाल होता है । जैसा कि आप जानते हैं इसका इस्तेमाल रास्ता ढुढने के लिए ज्यादा होता हैं। इसकी मदद से हम कहीं भी रास्ता आसानी से पता चालता है। हम अपनी लोकेशन से किसी दुसरी लोकेशन की दूरी आसानी से पता कर सकते है। इसके इस्तेमाल से आप अपने स्थान पर आसानी से पहुंच सकते हैं।

GPS  काम कैसे करता है? 

GPS Navigation

जैसा की पहले बताया हमारा Mobile GPS receiver  की तरह काम करता है। हमारा फोन सबसे पहले किसी नजदीकी सैटेलाईट से जुडता है और यह सिर्फ एक साथ जुडता नहीं हैं अपने नजदीकी सैटेलाइट आपके फोन से अलग अलग जानकारी लेते है और आपकी लोकेशन ,स्पीड आदि की जानकारी देता है।

मोबाइल फोन इंडस्ट्री में  GPS के प्रकार आजकल बढ़ते मोबाइल फोन इंडस्ट्री में इनका उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है । ये दो प्रकार के होते हैं जो इस प्रकार है

1. A-GPS(असिस्टेड GPS) इस तरह के GPS का इस्तेमाल GPS ही आधारित पोजिशनिंग सिस्टम के शुरु होने वाले समय को कम करने के लिए किया लाँक करने में रिसीवर की सहायता करता हैं । ऐसा करने के लिए हालांकि मोबाइल फोन में एक नेटवर्क कनेक्शन की भी जरुरत होती हैं क्योंकि A-GPS असिस्टेड सर्वर का इस्तेमाल करता हैं ।

2.S-GPS( साइमलटेनियसGPS)  एक नेटवर्क कैरियर के लिए सैटेलाइट  आधारित रिपोर्टिंग को सुधारने के लिए यह तरिका अपनाया जाता हैं । S- GPS से ही मोबाइल फोन को GPS और वाँइस डाटा दोनो एकही समय पर मिलते है! इससे ही नेटवर्क प्रोवाइडर लोकेशन आधारित सर्विस दे पाते हैं ।
निष्कर्ष -मुझे उम्मीद है आपको इस जानकारी से मदद मिलेगी ।

सामान्य प्रश्न

GPS की फुल फॉर्म क्या है?

GPS की full form हिंदी में वैश्विक स्थान-निर्धारण प्रणाली है, And in English, it is also known as Global Positioning System.

क्या अब भारत के पास अपना खुद का जीपीएस है?

जी हाँ, अब भारत के पास भी अपनी खुदकी 9 सटेलाईट्स हैं जिनके इस्तेमाल से भारत अपने क्षेत्र में और पडोसी देशों में निगरानी कर सकता है। भारत के अपने खुद के GPS को Indian Regional Navigation Satellite System ( IRNSS ) और NAVIC -Navigation with Indian Constellation के नाम से भी जाना जाता है जिसे ISRO के वैज्ञानिकों ने बनाया है।

अंबेडकर हस्तशिल्प विकास योजना : पूरी जानकारी

अंबेडकर हस्तशिल्प विकास योजना (Ambekdar Hastshilp Yojna) की शुरुआत सन 2001-02 मे भारत सरकार की टेक्सटाइल मिनिस्ट्री द्वारा शिल्पीयों की भागीदारी के साथ साथ हस्तशिल्प समूहों के विकास के लिए किया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य है हस्तशिल्पीयों का संपूर्ण रूप से विकास जो कि इस आधुनिक युग में खोता रहा है। हस्तशिल्प विकास योजना को स्वयं सहायता समूह के माध्यम से सिर्फ कारीगरों को इकट्ठा करने और वशिष्ठ डिजाइनों के माध्यम से नवीनतम तकनीकी प्रवृत्ति के साथ अपने कौशल को बेहतर बनाने में मदद करने के लिए शुरू किया गया था। इसके अलावा हस्तशिल्प विकास योजना खराब आर्थिक स्थिति वाले कारीगरों पर केंद्रित है जो उन्हें प्रौद्योगिकी पर आधारित उनके उन्नत कौशल को अपडेट करने के लिए उनका बहुत समर्थन करता है।

अंबेडकर हस्तशिल्प विकास योजना
अंबेडकर हस्तशिल्प विकास योजना

 अंबेडकर हस्तशिल्प विकास योजना के मुख्य उद्देश्य:-

  • हस्तशिल्पीयों के संपूर्ण विकास और प्रगति के लिए मुख्यतः हस्तकला के बारे में जागरुकता फैलाना ताकि यह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे।
  • हस्तशिल्प के कारीगरों प्रशिक्षण प्रदान करना तथा उन्हें अपने हस्तशिल्प उत्पादों को अधिक से अधिक बाजारों तक पहुंचाने में मदद करना ताकि उनका प्रचार और प्रसार हर जगह हो सके और उनकी जो संस्कृति धीरे धीरे हो रही है वह सही सलामत बची रहे।
  • हस्तशिल्प के कारीगरों को अच्छी शिक्षा तथा मार्केट के तकनीक से जुड़े ज्ञान प्रदान करना ताकि उन्हें अच्छा परिणाम मिले जिनसे उन्हें अपने द्वारा बनाए गए हस्तशिल्प को बाजार में बेचने में मदद मिले।
  • कारीगरों को उत्पाद के लिए अधिक मूल्य जोड़ने और उपभोक्ता के अनुकूल बनाने के लिए उत्तम गुणवत्ता वाले कच्चे माल डिजाइनिंग उपकरणों का उपयोग करने के तरीकों पर मार्गदर्शक करना है।
Ambedkar Hastshilp Yojna
Ambedkar Hastshilp Yojna

अंबेडकर हस्तशिल्प विकास योजना द्वारा कुल पांच गतिविधियां लगभग सभी क्षेत्रों में संचालित हैं जो कि इस प्रकार हैं:

  • Social Interventions
    • डायग्नोस्टिक सर्वे(Diagnostics Survey) और प्रोजेक्ट प्लान(Project Plan) को तैयार करना
    • सेल्फ हेल्प ग्रुप्स(SHGs) यानी कि स्वयं सहायता समूहो के कारीगरों के लिए सामुदायिक सशक्तिकरण
    • कारीगरों को पहचान पत्र जारी करना
  • TECHNOLOGICAL INTERVENTIONS
    • उन्नत व आधुनिक उपकरण का विकास तथा उनका सप्लाई
    • डिजाइन और तकनीकी विकास कार्यशाला
    •  इंटीग्रेटेड डिजाइन और तकनीकी विकास परियोजना
    •  कारीगरों की ट्रेनिंग
    • सेमिनार का आयोजन
  • MARKETING INTERVENTIONS
    • प्रदर्शनीयों का आयोजन
    •  इलेक्ट्रॉनिक मोड और ब्रांड निर्माण अभियान के माध्यम से प्रचार व प्रसार
    • वेयरहाउसिंग और कामन वर्क करने की जगह का स्थापना
  • FINANCIAL INTERVENTIONS
    • क्लस्टर प्रबंधक को मजदूरी का मुआवजा
    •  बाबासाहेब आंबेडकर हस्तशिल्प विकास योजना के एजेंसी के लिए सेवा शुल्क
    • क्रेडिट गारंटी
  • CLUSTER SPECIFIC INFRASTRUCTURE RELATED INTERVENTIONS
    • प्रमुख शिल्प के लिए संसाधन केंद्र की स्थापना
    • इ-किओस्क की स्थापना
    • कच्चे माल यानी कि रॉ मैटेरियल बैंकों की स्थापना
    • तकनीकी सहायता के लिए केंद्र की स्थापना

हस्तशिल्प विकास योजना के तहत आवेदन करने की योग्यता :-

 वह ऑर्गेनाइजेशंस (organisations) जो अंबेडकर हस्तशिल्प विकास योजना के तहत उनकी सुविधा तथा फंड पाने योग्य है-

  1. रेपुटेड एनजीओस (Reputed NGOs), कोऑपरेटिव (Corporatives) और ट्रस्ट्स (Trusts)
  2. रेपुटेड ऑर्गेनाइजेशंस (Reputed Organisations) यानी कि संगठन- COHANDS, EPCH, CEPC, MHSC, HCT, NCDPD, NIFT, NID, University Deptt., DRDA, NISIET, EDIs
  3. केंद्रीय हस्तशिल्प विकास निगम और अन्य संबंधित सरकारी एजेंसी
  4. राज्य सरकार या वित्तीय संस्थानों द्वारा प्रवर्तित निगम एजेंसियां
  5. गैर सरकारी संगठनों यानी कि एनजीओ (NGOs), सेल्फ हेल्प ग्रुप्स(SHGs)
  6.  केंद्र सरकार के उचित कानून के तहत पंजीकृत संगठन(Organisations)।

पिछले 5 वर्षों के दौरान अंबेडकर हस्तशिल्पी योजना के तहत 77,148 कारीगरों को जुटाया गया और लगभग 4572 सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHGs) का संगठन किया गया। SHGs इन कारीगरों को तकनीकी प्रशिक्षण और डिजाइन विकास कार्यक्रम जैसे विभिन्न प्रकार के हस्तक्षेप और संशोधनों के माध्यम से लाभान्वित किया गया है। 97 क्लस्टर विकास कार्यक्रम में से जो मंजूर किए गए जिनमें से 45 ऐसे कार्यक्रम पिछले 5 वर्षों के दौरान पूरे किए गए हैं और बाकी समूहों में पात्रता मानदंड के आधार पर कार्य करने वाली एजेंसियों के लिए अलग-अलग तरह के आवश्यकता पर आधारित हस्तक्षेप कार्यक्रम स्वीकृत किए जा रहे हैं।

अगर आप इस योजना के विषय में और भी डिटेल में जानना चाहते हैं तो हमारे द्वारा नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर स्कीम ऑफ़ हेंडीक्राफ्ट डेवलपमेंट अफसर के पीडीएफ (PDF) को डाउनलोड करके पढ़ सकते हैं:

 दोस्तों हम उम्मीद करते हैं अगर आप अंबेडकर हस्तशिल्प विकास योजना के बारे में जानकारी चाह रहे होंगे तो हमारा यह लेख आपके लिए मददगार साबित होगा। अगर फिर भी आपके मन में अंबेडकर हस्तशिल्पी योजना से जुड़ी कोई प्रश्न है तो आप हमारे द्वारा नीचे दिए कमेंट बॉक्स(Comment Box)  मे पूछ सकते हैं हम आपकी पूरी सहायता करेंगे।

 धन्यवाद!

गेटवे ऑफ़ इंडिया : इतिहास एवं रोचक तथ्य

वैसे तो भारत में कई पर्यटन स्थल हैं लेकिन अगर हम मुंबई की बात करें तो हमारे मन में सबसे पहले गेटवे ऑफ इंडिया (Gateway Of India) का नाम आता है। क्या आप जानते हैं की गेटवे ऑफ इंडिया का इतिहास क्या है और इसे किस कारण से बनाया गया था और किसने बनाया था? तो चलिए दोस्तों आज हम आपको अपने इस लेख की मदद से गेटवे ऑफ इंडिया के बारे में पूरे विस्तार से बताएंगे कि इसे किसने कब और क्यों बनवाया था और साथ-साथ हम आपको इसके कुछ रोचक तथ्यों के बारे में भी बताएंगे और अगर आपके मन में यह भी संदेह है की आखिर गेटवे ऑफ इंडिया और इंडिया गेट में क्या अंतर है तो हमारे इस लेख को ध्यान से पढ़ें।

गेटवे ऑफ इंडिया भारत की सबसे लोकप्रिय धरोहरों में से एक माना जाता है। यह भारत का एक बहुत ही बड़ा ऐतिहासिक स्मारक है जो कि मुंबई के होटल ताज महल के ठीक सामने स्थित है। अगर इसकी ऊंचाई की बात करें तो यह 26 मीटर यानी कि 85 फीट ऊंचा है और इसकी गुंबद  का व्यास 15 मीटर है। यह स्मारक साउथ मुंबई के अपोलो बंदर क्षेत्र में अरब सागर के बंदरगाह पर स्थित है। गेटवे ऑफ इंडिया अरब सागर के समुद्री मार्ग से आने वाले जहाजों के लिए भारत का द्वार भी कहा जाता है। इसे अरब सागर की ओर बनाया गया है जो मुंबई शहर के एक अन्य आकर्षण मरीन ड्राइव से जुड़ा है, यह एक सड़क है जो समुंद्र के साथ साथ चलती है। इसे देखने के लिए प्रतिवर्ष लाखों लोग आते हैं और यह मुंबई के लोगों की जिंदगी का एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि यह शहर की संस्कृति को दर्शाता है जोकि ऐतिहासिक और आधुनिक संस्कृति को जोड़ता है।

गेटवे ऑफ इंडिया का इतिहास (Gateway of India History in Hindi):-

अगर गेटवे ऑफ इंडिया की इतिहास के बात करें तो इसका निर्माण सन 1924 में हुआ था। जिसकी संरचना के निर्माण में भारत सरकार का लगभग 21 लाख रुपए खर्च हुआ था। गेटवे ऑफ इंडिया की संरचना के निर्माण के पीछे मुख्य उद्देश्य किंग जॉर्ज और क्वीन मैरी कि मुंबई यात्रा था, जो कि उनकी यात्रा को याद करने के उपलक्ष्य ने बनाया गया था। गेटवे ऑफ इंडिया का निर्माण दिल्ली दरबार से भी पहले हुआ था। वैसे तो गेटवे ऑफ इंडिया का निर्माण किंग जॉर्ज और रानी मैरी के लिए किया गया था परंतु वह इसकी संरचना का एक ही मॉडल देख पाए थे क्योंकि उस समय इसका निर्माण  शुरू नहीं किया गया था। गेटवे ऑफ इंडिया के निर्माण का नीव 31 मार्च 1911 को मुंबई के राज्यपाल चार्ज सिडेनहैम क्लार्क ने रखी थी, जिसके बाद जॉर्ज वीटेट ने 31 मार्च 1914 को इस के अंतिम डिजाइन को मंजूरी दी थी, जिसके बाद गेटवे ऑफ इंडिया का निर्माण सन 1915 में शुरू हुआ। गेटवे ऑफ इंडिया को पीले बेसाल्ट चट्टानों से बनाया गया था। 1915 और 1919 के बीच में अपोलो बंदरगाह पर इसका काम शुरू हुआ जहां पर गेटवे ऑफ इंडिया और नए समुद्री दीवार का निर्माण किया गया। गेटवे ऑफ इंडिया नीव का काम 1920 में पूरा किया गया था जिसके बाद करीब एक दशक तकिया इमारत बनती रही और 1924 में यह पूरी तरह बनकर तैयार हुई। 4 दिसंबर 1924 को वायसराय अर्ल ऑफ रीडिंग ने उद्घाटन किया था। इंडो सरासेनिक डिजाइनर तरीके से बनी इस इमारत पर मुस्लिम स्थापत्य और गुजरात के स्थापत्य के स्टाइल का महत्व माना जाता रहा है। कुछ वक्त बाद स्वामी विवेकानंद और छत्रपति शिवाजी की भी मूर्तियां गेटवे पर स्थापित की गई थी। आज यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण स्मारकों में से एक के रूप में बना हुआ है। यह ताकत, शक्ति और शांति का प्रतीक है।

गेटवे ऑफ इंडिया से जुड़े कुछ रोचक तथ्य (Facts about Gateway of India):-

  • अगर गेटवे ऑफ इंडिया से जुड़े एक रोचक तथ्य के बाद करें तो जब आजादी के बाद 1947 में अंग्रेज भारत छोड़कर जा रहे थे तो उनका आखिरी जहाज भी यहीं से रवाना हुआ था।
  •  गेटवे ऑफ इंडिया को मुंबई के ताज महल के रूप में भी जाना जाता है।
  •  गेटवे ऑफ इंडिया देश में तीन प्रमुख आतंकवादी हमलों का स्थान रहा जो 2003 और 2008 में मुंबई ताज होटल और अन्य प्रमुख स्थानों पर हुए थे।
  •  गेटवे ऑफ इंडिया के समीप ही पर्यटक को के समुंद्र भ्रमण हेतु नाव की सेवा भी उपलब्ध है जो इसकी सुंदरता को और भी दर्शाती है।
  • गेटवे ऑफ इंडिया के गुंबद के निर्माण में 21 लाख रुपए का खर्च आया था और पूरे गेटवे ऑफ इंडिया का निर्माण में 2.1 मिलियन की लागत आई थी।

गेटवे ऑफ इंडिया और इंडिया गेट में अंतर (Difference between India Gate & Gateway of India in Hindi)

गेटवे ऑफ इंडिया और इंडिया गेट में अंतर
गेटवे ऑफ इंडिया और इंडिया गेट में अंतर
  • गेटवे ऑफ इंडिया और इंडिया गेट मे पहले अंतर की बात करें तो इंडिया गेट दिल्ली के राजपथ पर स्थित है और वहीं दूसरी तरफ गेट ऑफ इंडिया की बात करें तो वह दक्षिण मुंबई में समुंदर तट के पास स्थित है।
  • अगर इन दोनों की ऊंचाई की बात करें तो गेटवे ऑफ इंडिया की ऊंचाई महज सिर्फ 26 मीटर है और वही बल्कि इंडिया गेट की ऊंचाई 42 मीटर है जो कि गेटवे ऑफ इंडिया से 16 मीटर ज्यादा ऊंची है।
  • दोनों के बनने के बिल्कुल ही अलग कारण है, गेटवे ऑफ इंडिया ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम और रानी मैरी की भारत यात्रा को याद रखने के उपलक्ष में बनवाया गया था और वहीं दूसरी तरफ इंडिया गेट का निर्माण प्रथम विश्व युद्ध और अफगान युद्ध मैं मारे गए भारतीय जवानों की याद रखने के उपलक्ष में बनवाया गया था जिस पर उनके नाम भी उतरे हुए हैं।
  • इन दोनों के वास्तुशिल्पी की बात करें तो इंडिया गेट के वास्तुशिल्पी थे एडविन ल्युट्यैन्स और वहीं दूसरी तरफ गेटवे ऑफ इंडिया के वास्तुशिल्पी थे जॉर्ज वीटेट।
  • गेटवे ऑफ इंडिया तो 1924 में ही बनकर तैयार हो गया था और वहीं दूसरी तरफ  इंडिया गेट 1931 में बनकर तैयार हुआ था।
  • इंडिया गेट का निर्माण करने में मुख्य रूप से लाल और पीले पत्थरों का उपयोग किया गया था जीन्हे खासतौर पर भरतपुर से लाया गया था और वहीं दूसरी तरफ गेटवे ऑफ़ इंडिया के निर्माण में मुख्य रूप से पीले बेसाल्ट चट्टानों का इस्तेमाल किया गया था।
  • इंडिया गेट को मूल रूप से अखिल भारतीय युद्ध स्मारक भी कहा जाता है और वहीं दूसरी तरफ गेटवे ऑफ इंडिया को समुद्र के रास्ते भारत आने वालों के लिए भारत का मुख्य द्वार कहा जाता है और साथ साथ इसे कुछ लोग मुंबई का ताज महल कहते हैं।

तो दोस्तो हम उम्मीद करते हैं कि अगर आप गेटवे ऑफ इंडिया और इससे जुड़े इसके रोचक तथ्यों तथा इतिहास के बारे में जानना चाहते होंगे तो हमारा यह लेख आपके लिए मददगार साबित होगा। अगर फिर भी आपके मन में गेटवे ऑफ इंडिया से लेकर और कोई प्रश्न या सवाल है तो आप हमारे द्वारा नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स (Comment Box) में पूछ सकते हैं। हम आपको पूरी जानकारी देंगे।

धन्यवाद!

लघु उद्योग के लिए लोन कैसे लें? 

भारत देश में बढ़ती हुई बेरोजगारी को देखते हुए बहुत से व्यक्ति के मन में अपना खुद का एक नया बिजनेस शुरू करने की इच्छा होती है। पर बहुत से लोगों के पास बिजनेस स्टार्ट करने के लिए ऐसा नहीं होता है जिससे वह अपना बिजनेस स्टार्ट नहीं कर पाते हैं पर अब लघु उद्योग लोन की मदद से वह सभी लोन लेकर अपना खुद का बिजनेस स्टार्ट कर सकते हैं।

लघु उद्योग के लिए लोन आप बैंक तथा जिला उद्योग केंद्र से भी ले सकते हैं-

बैंक द्वारा लघु उद्योग के लिए लोन

  • बैंक से लोन लेने के लिए किसी भी बैंक में हमारा खाता खुला हुआ होना चाहिए।
  • बैंक हमारा व्यक्तिगत व्यवहार भी देखता है इसलिए हमारा अपने समाज के प्रति अच्छा व्यवहार होना चाहिए।
  • हमें एक ऐसा बिजनेस स्टार्ट करना होगा जिससे कि हमारे साथ साथ और भी लोगों को फायदा हो।
  • बैंक हमसे हमारे उद्योग की शुरुआत करने का एक रीजन मांगता है इसलिए हमारे पास उस उद्योग के लिए महत्वपूर्ण रीजन होना चाहिए।
  • सरकार द्वारा बहुत सारी योजनाएं चलाई गई है, जैसे
  • इत्यादि सभी योजना सरकार द्वारा चलाई गई हैं। जिसमें से हमें किसी एक योजना का ही चयन करना होगा जिसके अनुसार हमें लोन लेना होगा।
  • हमें जी सूचना के तहत कम ब्याज दर पर लोन मिलेगा तथा जी सूचना के तहत हमें आगे भविष्य में फायदा होगा उसी योजना हमें लोन लेना चाहिए।
  • हम किसी बैंक से लोन ले उस बैंक के लोन देने की पूरी प्रक्रिया को अच्छे से समझ लें।
  • हमें उस बैंक द्वारा जो लोन लेने का फॉर्म मिलेगा उसे पूरा भर कर और उसके साथ जो जो उसमें दस्तावेज मांगे जाएंगे उसके साथ जमा करना होगा।
  • हमें अपने बिजनेस के फायदे और मुनाफे दोनों के बारे में बैंकों पूरी जानकारी देनी होगी इससे बैंक यह सुनिश्चित कर लेता है कि उनके द्वारा दिया गया लोन का पैसा उनको वापस मिल पाएगा या नहीं।
  • हमें अपने पहचान पत्र, वोटर आईडी, आधार कार्ड, पैन कार्ड या पासपोर्ट इन सभी में से किसी एक को बैंक को देना जरूरी होता है।
  • हम SC/ST/OBC/General किस जाति में आते हैं उसका भी प्रमाण देना होता है।
  • हमें अपने पिछले 6 महीने की बैंक खाते की पूरी स्टेटमेंट जमा करनी होती है।
  • बैंक आप से लोन लेते समय आपके डॉक्यूमेंट तथा आपके पिछले 2 से 3 साल तक का पूरा बैंक बैलेंस शीट जैसे कि आपका इनकम टैक्स, सेल टैक्स, तथा बिजली का बिल आदि सहित जुड़े हुए सभी कागजात भी मांगता है।

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महिला उद्यम निधि

जिला उद्योग केंद्र द्वारा लघु उद्योग के लिए लोन

  • जिला उद्योग केंद्र से लोन लेने के लिए जरूरी दस्तावेज में आपका आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो तथा आप का स्थाई प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है।
  • जिला उद्योग केंद्र द्वारा लोन लेने के लिए आपकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए तथा आप की कक्षा आठवीं तक की पढ़ाई उत्तरीण होनी चाहिए।
  • नया व्यापार क्षेत्र के लिए ही आप इस योजना का लाभ उठा सकते हैं अगर आप किसी और क्षेत्र में किसी योजना का लाभ उठा रहे हैं तो आप इस योजना का लाभ नहीं उठा सकते हैं।
  • अगर आप बीपीएल कार्ड धारक है तब भी आप इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

महिला लघु उद्योग लोन

भारत सरकार ने महिलाओं को आत्मनिर्भर क्यों उनका आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए महिला उद्यम निधि स्कीम की शुरुआत की है।

महिला उद्यम निधि क्या है

महिला उद्यम निधि एक ऐसा स्कीम है जो महिला उद्यमियों को सुलग ऋण उपलब्ध कराने के लक्ष्य में लघु उद्योग विकास बैंक द्वारा शुरू की गई है। जैसा कि नाम से यह स्पष्ट हो जा रहा है यह स्कीम केवल महिलाओं के लिए ही लागू की गई है। इस स्कीम के अंतर्गत वह महिलाएं जो अपना खुद का एक उद्योग स्टार्ट करना चाहती थी वह महिलाएं इस स्क्रीन की मदद से अपने उद्योग को स्टार्ट आसानी से कर सकती है।

महिला उद्योग निधि स्कीम के अंतर्गत लोन कैसे लें?

  • महिला उद्योग निधि स्कीम के अंतर्गत मार्जिन मनी को मिलाकर इसकी लागत अधिक से अधिक 1000000 रुपए तक ही तय की गई हैं।
  • सुलभ ऋण पूरी प्रोजेक्ट कॉस्ट का केवल पच्चीस परसेंट दिया जाएगा जो अधिक से अधिक ढाई लाख रुपये तक होगी और उद्यमी को पूरी प्रोजेक्ट कास्ट का 10 परसेंट अपनी जेब से लगाना पड़ेगा।
  • सिक्योरिटी के तौर पर काल्पनिक औजार उपकरण मशीनों का रखा जाएगा हालांकि लोन लेने वक्त थर्ड पार्टी गारंटी मान्य होगी।
  • सुलभ ऋण पर किसी प्रकार की कोई जमानत सिक्योरिटी के तौर पर बैंक द्वारा नहीं ली जाएगी।
  • सुलभ ऋण पर ब्याज की दर के तौर पर केवल सालाना एक परसेंट सर्विस चार्ज लोन पर देना होगा।
  • शेष अमाउंट अर्थात टर्म लोन पर ब्याज की दर समय-समय पर एस आई डी बी आई द्वारा निर्धारित की गई दर के हिसाब से देना होगा।
  • महिलाओं द्वारा चलाए गए आर्थिक रूप से कमजोर लघु उद्योग एवं छोटी इकाई चाहे वह निर्माण क्षेत्र से हो या सेवा क्षेत्र से इस स्कीम के तहत को आसानी से लोन ले सकते हैं।
  • यदि कोई महिला किसी लघु उद्योग को बड़े अच्छे से चला रही है और उसने इस स्कीम के तहत लोन लिया था और अब तक उसने इस स्कीम के तहत लिया लोन चुका दिया है तो ऐसी स्थिति में वह दुबारा से लोन के लिए अप्लाई कर सकती है।
  • इस महिला उद्यम निधि स्कीम के अंतर्गत लोन चुकता करने की अवधि 10 वर्ष निर्धारित की गई है।

पूरी लेख के द्वारा आप लघु उद्योग के लिए लोन लेने के लिए आसानी से अप्लाई कर सकते हैं। तथा महिलाओं को भी लोन लेने में इसलिए के द्वारा आसानी होगी। यदि आप इसके अलावा और भी किसी चीज के लिए लोन लेने के बारे में जानना चाहते हैं तो आप हमसे हमारे कमेंट बॉक्स में आकर पूछ सकते हैं।